Call us 91 - 7408917548    supperlavkush@gmail.com

मोहब्बत का इज़हार

वो आये थे हमारी गली में,
हम दीदार न कर सके।
वो दिखे भी तो ऐसे कि,
हम मोहब्बत का इज़हार न कर सके।।

Lavkush Yadav "AZAL"

आसमान

परिंदा नया है उड़ने दो आसमान में,
लहर ठहरी नही अब तालाब में।
तरकश से तीर तो निकलने दो जनाब,
हजारो दिए जलेंगे मेरे घर के चिराग में।।

                                                                                                                                                                                                            लवकुश यादव "अज़ल "

ज़ज्बात

तेरी साज़िश और मेरी मेहनत में फ़र्क़ होगा,
मेरे हर एक सवाल में एक तर्क होगा।
आसान नही हूँ आसान न समझो,
मेरे और तेरे दिल के जज्बात में फ़र्क़ होगा।।

लवकुश यादव "अजल "

मोहब्बत

मोहब्बत में शायद ऐसे फूल खिले ही नही,
बागों में शायद ऐसे फूल लगे ही नही।
दीवानों की बस्ती ने लाखों लोग हुए जख्मी,
मेरे जख्म ऐसे भरे की फिर जख्म हुए ही नही।।

लवकुश यादव "अज़ल "

सोच

तालाब छलक उठते है थोड़े से पानी में,
नदियाँ भी उफ़ान ले लेती है बारिश में।
और आपकी सख्शियत की बात क्या करें,
आप समंदर से गहरे हैं ठहरे हुए पानी में।।

लवकुश यादव "अज़ल"

हसरत

आँखो में न जाने क्यों बरसात सी रहती है,
दुनियां न जाने क्यों हमको बेकार समझती है।
मुलाकातें हो न हो यादे बरकरार रहती हैं ,
मेरी आँखों का क्या कसूर जो पल पल रिसती हैं।।

लवकुश यादव "अज़ल"

पानी

तेरी आँखों में जैसे उतरता गया,
जैसे झरने का पानी तैरता गया |
झील आँखों को देखा तो ऐसा लगा,
मैं लिखता गया तू समझता गया ||

लवकुश यादव "अज़ल "

दोस्ती

दोस्ती की परीक्षा आकाश पर है, तुमको सूचित हो,
दिलों में गहरे जख्म का एहसास हुआ है, तुमको सूचित हो।
सरस ऋतु प्यार की देवी, बेवफा हो गयी कैसे,
हजारो अश्रु नैनो से गिरे है, तुमको सूचित हो।।

दुर्गेश कुमार मिश्र

लम्हें

उदास है लम्हे गजले लिखे तो कैसे ,

मोहब्बत करे तो लेकिन आइना बने कैसे|

नींद है आँखों में सोये भला कैसे ,

बहार पड़े है जो अपने अन्दर बुलाये तो भला कैसे||

लवकुश यादव "अज़ल"

चाहत

ख़ुदा की चाहत से ज़्यादा तुझसे प्यार करता हूं,
हर दुआ में सिर्फ तुझे इक्तयार करता हूं।
मांगना हो दुनिया की दौलत मैं इनकार करता हूं,
मेरी जान मैं सिर्फ तुझसे प्यार करता हूं।।

लवकुश यादव "अज़ल "

इजहार

ग्रहण लगा है नींदों पर ख्वाबो की उम्मीद करे कैसे ,
है प्यार बहुत उनसे पर खुद इजहार करे कैसे |
दिल टूट न जाए उनके न कहने से ,   
होंठो से लव पर इजहार के लफ्ज कहें कैसे ||

लवकुश यादव "अज़ल "

दर्द इजहार का

उन्हें यकी न था मेरे इश्क़ पे,
सीने को चाक न करते तो क्या करते |
हम भी मोहब्बत के सताए थे ,
अपना दर्द शायरी में न लिखते तो क्या करते ||

वसीम "अमेठी "

लेखनी कलम की

उग रहा है सूरज बुलंदिया छूना अभी बाकी है,

लिख रहा हूँ कुछ समझना अभी बाकी है |

कलम चलाने की शुरुआत अभी से होती है,

हौसला है मंजिल और मुकाम अभी बाकी है ||

लवकुश यादव "अज़ल "

लेखक और पाठक

कोई शायर समझता है, कोई ब्लॉगर समझता है,

मगर पाठक की बेचैनी को ,बस लेखक समझता है।

मैं शायरी से दूर कैसा हूँ, पाठक इससे दूर कैसे हैं,

ये बस पाठक समझता है ,या लेखक ही समझता है।

दुर्गेश मिश्र "सनी*

Welcome to our vision


Works independently on the artistic and technical sides of his pieces, incorporating technologies, including custom software and Hardware.Creates contemporary, exploratory artworks that fuse low tech with high tech, including interactive art installations, public artworks, and video.

Senior - Engineer 

2013-2017

Junior - Engineer 

2010-2013

Trainee - Engineer 

2008-2010